Wednesday, January 19, 2022

वेब रिव्यू : ‘दिल बेकरार’ करार भी करती है बेकरार भी मगर कम

एक वकील का परिवार जिसकी पांच बेटियां है। बेटियों का नाम याद रहे इसलिए उसने नाम अंग्रेजी के एल्फाबेट के अनुसार रख दिया। ए, बी, सी, डी , ई। एक बेटी उनमें से भाग गई। लेकिन कैसे? ये नहीं पता चलता। किसके साथ? यह नही दिखाया जाता है। एक बेटी है जो शादी नहीं करना चाहती। जॉब्स भी छोड़ रही है लगातार। लेकिन फिर न्यूज एंकर बन जाती है। एक बेटी अभी पढ़ रही है। बाकी दो के बारे में आप इस सीरीज को देख कर जान लीजिएगा।

वकील का बाप ठरकी बताया जाता है। लिहाजा उसके बच्चे भी ठरकपन का शिकार नजर आते हैं। इधर वकील के एक करीबी दोस्त का बेटा भी न्यूज एंकर है। जो वकील की बेटी द्वारा सुनाई गई ख़बर पर ही एक खबर लिखता है। जिस वजह से उनकी शादी नहीं हो पाती। दोनों के ऑफिस की बातें उनके पर्सनल रिश्ते पर असर डालती है। असर डालने वाली खबर का कारण है भोपाल गैस कांड।

अब भागी हुई बेटी का कुछ पता लगा? भोपाल गैस कांड की खबर का क्या हल निकला? उन दोनों न्यूज एंकर के रिश्ते का क्या हुआ? गैस कांड करवाने वाले दोषियों का क्या कुछ हुआ? एक बेटी जो अपने पति को बिजनेस खड़ा करवाने के लिए वकील बाप की सम्पत्ति से हिस्सा चाहती थी उसे मिला? जैसे कई सवाल के जवाब मिलते हैं तो कई के नहीं।

निर्देशक ‘हबीब फैजल’ की वेब सीरीज ‘दिल बेकरार’ डिज्नी हॉट स्टार पर रिलीज हुई है। जिसमें 80-90 के बीच का दशक है। कहानी से आपने ऊपर पढ़ ही लिया। लेखिका ‘अंजू चौहान’ के अंग्रेजी उपन्यास ‘दोज़ प्राइसी ठाकुर गर्ल्स’ पर आधारित इस सीरीज में कई अच्छी बातें हैं जैसे 80-90 के दशक का लुक, सिनेमैटोग्राफी, उस समय की फिल्मों के नाम से सीरीज के 10 एपिसोड्स, उसी समय के थोड़े-थोड़े गाने, थोड़ा प्यार, थोड़ी मस्ती-मजाक और ऑन एन एवरेज अच्छी एक्टिंग, बैकग्राउंड स्कोर, मेकअप, कॉस्ट्यूम, लोकेशन्स।

Web series Dil bekaraar all episode download leaked by tamilrockers

मगर हल्का है तो इसकी स्क्रिप्टिंग जो इसे लंबा खींच ले जाती है। कई सारी बातें बाहर नहीं ला पाना भी एक कमजोरी है। सम्भवतः इस सीरीज के खत्म होने पर आप स्वत: अंदाजा लगा लें कि इसका दूसरा सीजन तो आना चाहिए। एडिटिंग भी एक बड़ी कमजोरी है। दरअसल इस सीरीज को देखने के लिए आपको हर एपिसोड के 30 से 35 मिनट के हिसाब से अच्छा खासा अपना वक्फ़ा (समय) देना होना।

‘अक्षय ओबेरॉय’, ‘राज बब्बर’, ‘पद्मिनी कोल्हापुरे’, ‘पूनम ढिल्लों’, ‘सरत सोनी’ , ‘चंद्रचूड़ सिंह’, ‘सहर बंबा’, ‘अंजलि दिनेश आनंद’, ‘सुखमनी सडाना’, ‘मेधा शंकर’ और श्वेता पड्डा आदि जैसी अच्छी खासी लंबी स्टार कास्ट वाली यह सीरीज बहुतेरों को शायद न जमे। या एकबारगी उन्हें शुरू के 4-5 एपिसोड देखने के बाद लगे कि यह अच्छी नहीं है और बीच में आप इसे छोड़ दें तो आप कई अच्छी चीजें देखने को खुद से दूर कर देंगे। लिहाजा थोड़ा पेशेंस रखिए।

ऐसा भी नहीं है कि यह बहुत बढ़िया सीरीज है। लेकिन ऐसा भी नहीं कि इसे यूँ बीच में देखना छोड़ दिया जाए। हाँ इसके एपिसोड 7-8 तक रखे जा सकते थे। अंत तक आते-आते कुछ ऐसा घटित होता है कि भोपाल गैस कांड की एक विक्टिम आपको अपनी एक्टिंग से हैरान कर जाती है। दरअसल यह रोल किया है श्वेता पड्डा ने। जो इससे पहले निर्देशक ‘दीपांकर प्रकाश’ की फेस्टिवल्स में खूब तारीफ़ें बटोर चुकी फ़िल्म ‘मूसो’ में नजर आ चुकी हैं।

ख़ैर 80-90 के दशक को आप फिर से जीना चाहें या फिर पूरे परिवार के साथ बैठकर लंबे समय से यह प्लान बना रहे हैं कि कोई ढंग की सीरीज देखें लेकिन कौन सी इसका चुना व नहीं कर पा रहे हैं तो इस हफ्ते ‘दिल बेकरार’ सीरीज को देखकर आप इस प्लान को सरअंजाम तक पहुंचा सकते हैं। बशर्ते आप धैर्यवान हों।

अपनी रेटिंग – 3.5 स्टार

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

Related Articles

Stay Connected

21,986FansLike
3,118FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles