Monday, October 25, 2021

जन्मदिन विशेष : फिल्मी पर्दे के रेपिस्ट ‘प्रेम चोपड़ा’

Unknown Facts About Prem Chopra: हिंदी सिनेमा के मशहूर विलेन प्रेम चोपड़ा आज अपना 86 वां जन्मदिन मना रहे हैं।

हिंदी सिनेमा के एक्टर्स के लिए रोल मॉडल कहे जाने वाले विलेन प्रेम चोपड़ा का आज 86 वां जन्मदिन है। फिल्मों में प्रेम चोपड़ा का होना ही उनकी सफलता की गारंटी हुआ करता था। और इस बात की फिल्में गवाह भी होती थीं कि हीरोइन के साथ जरूर कुछ गलत हरकत होगी। जब वो ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ बोलते तो अच्छे-अच्छों की घिग्गी बंध जाती थी।

हिंदी सिनेमा जगत में विलेन का किरदार निभाकर कामयाबी की बुलंदियों को छूने वाले प्रेम चोपड़ा ने फिल्मी पर्दे पर विलेन को हमेशा अपने अभिनय एवं किरदार से अमर बना दिया। अपने करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा बार रेप के सीन्स दिए।

उनके पिता उन्हें अफसर बनाना चाहते थे। लेकिन बेटा बन गया विलेन। 23 सितंबर 1935 को लाहौर पाकिस्तान में जन्में चोपड़ा का परिवार बंटवारे के बाद शिमला की वादियों में शिफ्ट हो गया। वहीं उनका बचपन गुजरा और प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं हुई।

फिल्मी सफर की शुरुआत उन्होंने साल 1960 में फिल्म ‘मुड़ मुड़ के न देख’ से की थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं दिखा पाई जिसके बाद प्रेम चोपड़ा ने पंजाबी फिल्मों की ओर रुख किया। उनकी चर्चित फिल्मों में ‘हम हिंदुस्तानी’, ‘वो कौन थी?’, ‘शहीद’, ‘मेरा साया’, ‘प्रेम पुजारी’, ‘पूरब’ और पश्चिम’, ‘कटी पतंग’, ‘दो अनजाने’, ‘काला सोना’, ‘दोस्ताना’, ‘उपकार’, ‘बॉबी’, ‘दो रास्ते’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘मर्द’, ‘क्रांति’, ‘जानवर’, ‘फूल बने अंगारे’, ‘महबूबा’ आदि रहीं।

Unknown Facts About Prem Chopra

यूँ तो उन्होंने कई रेप सीन फिल्माए लेकिन 70 के दशक की एक फ़िल्म के एक सीन की वजह से उन्हें हीरोइन का गुस्सा भी झेलना पड़ा था। जिसके बाद खासा विवाद भी हुआ। दरअसल एक सीन में प्रेम चोपड़ा को पीछे से आकर हीरोइन को दबोचना था। प्रेम चोपड़ा ने डिमांड के हिसाब से ऐसा ही किया, लेकिन किसी वजह से हीरोइन सही एक्सप्रैशन नहीं दे पा रही थी। जोर-जबरदस्ती का जो रिएक्शन निर्देशक को चाहिए था वो नहीं मिल पा रहा था। सीन के लिए कई रीटेक देने पड़े लेकिन फिर भी सीन सही शूट नहीं हो पाया।

सीन आखिरकार शूट हुआ लेकिन हीरोइन ने निर्देशक से प्रेम चोपड़ा की शिकायत कर दी। प्रेम चोपड़ा कुछ समझ पाते इससे पहले एक थप्पड़ मारने वाला सीन शूट होना था, जो कि हीरोइन प्रेम चोपड़ा को मारती। जैसे ही शूट शुरू हुआ हीरोइन ने प्रेम चोपड़ा को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि सब सहम गए और शूटिंग सेट पर सन्नाटा छा गया।

फिल्मों में विलेन के रोल को लेकर एक बार प्रेम चोपड़ा ने कहा था, हीरो मैं बन नहीं पाया तो किस्मत ने मुझे विलेन बना दिया। मैं खुश हूं कि उस दौर में फिल्मों को हिट कराने में विलेन की भूमिका भी बड़ी महत्वपूर्ण हुआ करती थी और लोग आपके डायलॉग सालों-साल याद रखते थे। लोग मुझसे अपनी पत्नियों को छुपा लेते थे ताकि कोई गलत हरकत ना हो। ये मेरे द्वारा निभाए गए किरदार का ही असर था।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक कोरोना महामारी की वजह से इस बार प्रेम चोपड़ा ने अपने जन्मदिन को परिवार के साथ ही मनाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि “मैं अपना जन्मदिन परिवार के सदस्यों के साथ मनाऊंगा। घर में सुबह हवन होगा, और फिर हम सभी दोपहर के खाने और रात के खाने के लिए एक साथ मिलेंगे।”

प्रेम चोपड़ा पिछले छह दशकों से बॉलीवुड पर राज कर रहे हैं। प्रेम नाम हैं प्रेम चोपड़ा जैसे उनके डॉयलॉग आज भी बच्चे-बच्चे को रटे हुए हैं। जल्द ही वो फिल्म बंटी और बबली 2 में दिखाई देंगे। ये फिल्म तो बनकर तैयार है बस रिलीज का इतंजार है। इसके अलावा वो इन दिनों फिल्म ‘नौटंकी’ भी कर रहे हैं।

Unknown facts about bollywood villain prem chopra
Unknown Facts About Prem Chopra

अपनी कमाल की खलनायिकी से करोड़ों दर्शकों का दिल जीत लेने वाले प्रेम चोपड़ा इंडस्ट्री में सबकी तरह बनने तो हीरो आए थे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। अनोखी सी मुस्कान, गोल गोल घूमती आंखें और चबा-चबा कर डायलॉग्स बोलने के अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का मशहूर विलेन बना दिया। लेकिन इस संयोग ने उन्हें इतना मशहूर कर दिया, जितना उनके अनुसार वो हीरो बनकर नहीं हो पाते।

रेप सीन के बारे में बात करते हुए प्रेम ने एक बार कहा था कि ”रेप सीन में एक्ट्रेस के खूब नखरे हुआ करते थे, बड़ी-बड़ी एक्ट्रेस ने मेरे साथ रेप के सीन किए हैं लेकिन वो बेहद प्रोफेशनल होती थीं और तुरंत सीन खत्म कर देती थीं। मैंने कभी किसी फिल्म में बिना वजह रेप सीन नहीं डलवाया।”

किसी जमाने में दिलीप कुमार के प्रशंसक रहे प्रेम दिलीप को देखने की तमन्ना पाले हुए थे लेकिन संयोग से उन्हीं के साथ आधा दर्जन फिल्मों में पर्दा साझा किया। उन्होंने अपने नाम और काम से फिल्मी पर्दे पर आतंक तो मचाया ही साथ ही जनता का खूब प्यार भी पाया। पहले पंजाबी फिल्मों में हीरो रहे, टाइम्स ऑफ इंडिया में नौकरी भी की। इनके नाम का आतंक इतना था कि लोगों ने अपने बच्चों का नाम प्रेम तक रखना बन्द कर दिया। ‘उपकार’ फ़िल्म से इन्हें खासी प्रसिद्धि मिली। सड़कों, प्लेटफॉर्म पर भी कई रातें गुजारीं।

‘शहीद’ फ़िल्म में उनके द्वारा शहीद सुखदेव का निभाया गया किरदार आज भी याद किया जाता है। अभिनय के मामले में उनके नाम 450 से ज्यादा फिल्में दर्ज हैं। जिस तरह साहित्य में नो रस मिलते हैं उसी तरह प्रेम के द्वारा निभाए गए इन जुदा-जुदा किरदारों में भी उन्हीं नो रसों का रंग बिखरा मिलता है। एक ही किस्म के रोल में कोई जुदा-जुदा अभिनय करना चाहे तो प्रेम चोपड़ा से बड़ा गुरु उनके लिए शायद ही कोई होगा।

पुराने जमाने के विलेन जब काफी लाउड होते थे थे तब ऐसे में विलेन हीरो की पर्सनेलिटी लेकर आता था। प्रेम चोपड़ा ने भारतीय सिनेमा ही नहीं बल्कि अमेरिकन फ़िल्म ‘डिसेंट’ में भी अपने अभिनय की अदायगी के जलवे बिखेरे हैं। एक साधारण आम जीवन में भावुक रहने वाले प्रेम चोपड़ा के कुछ यादगार डायलॉग्स (संवादों) के जरिए उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूँ।

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‘प्रेम नाम है मेरा…. प्रेम चोपड़ा।’ (‘बॉबी’ नाम की इस फ़िल्म में उन्हें गेस्ट अपीयरेंस के लिए उस जमाने में 25 हजार रुपए दिए गए थे।)

‘भैंस पूंछ उठाएगी।’

‘नँगा नहाएगा क्या निचोड़ेगा क्या?’

फिल्म आग का गोला में प्रेम चोपड़ा का पॉपुलर डॉयलॉग था, ‘शराफत और ईमानदारी का सर्टिफिकेट ये दुनिया सिर्फ उसी को देती हैं जिसके पास दौलत होती है’

‘कैलाश खुद नहीं सोचता, दूसरों को मजबूर करता हैं सोचने के लिए।’

‘मैं वो बला हूं, जो शीशे से पत्थर को तोड़ता हूं।’

‘बादशाहों का अंदाजा बहुत कम गलत होता है.. और जब गलत होता है, तो वो बादशाह नहीं रहते।’

‘राजनीति की भैंस को चलाने की लिए दौलत की लाठी की जरुरत होती है।’

‘जिनके घर शीशे के होते हैं वो बत्‍ती बुझा कर कपड़े बदलते हैं।’

‘कर भला तो हो भला।’ राजा बाबू फ़िल्म का यह डायलॉग जिस अंदाज से प्रेम चोपड़ा बोलते हैं उससे वे सिने शैदाईयों के दिलों को अंदर तक घायल कर देते हैं।

‘सांप के फन उठाने से पहले मैं उसे कुचलना अच्छी तरह से जानता हूं।’

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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