Monday, October 25, 2021

जन्मदिन विशेष: मेरी आवाज ही पहचान है स्वर साम्राज्ञी ‘लता मंगेशकर’

Unknown Facts About Lata Mangeshkar: आज है सुरों की मल्लिका महान गायिका लता मगेंशकर का 92वां जन्मदिन

हिंदुस्तान में सुरों की बेताज गायिका लता मंगेशकर आज 92 वें वर्ष की हो चुकी हैं। आज वे अपना 92 वें वां जन्मदिन मना रही हैं। सुरों की मधुर स्वर लहरियां बिखेरने वाली लता को हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ‘लता दीदी’ के नाम से ज्यादा पुकारा जाता है।

यूं तो उनके जीवन से जुड़े कई किस्से और विवाद , अफवाहें भी सोशल मीडिया पर तैरती रही हैं। यहां तक कि एक बार तो उनके निधन की खबरें भी अफवाह बनकर ऐसी उड़ी की, जंगल में आग की तरह फैल गई। भारतीय सिनेमा की महानतम गायिकाओं में शामिल की जाने वालीं ‘भारत रत्न’ से सम्मानित हो चुकीं लता मंगेशकर की सुरीली आवाज़ सांस्कृतिक और राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान एवं आवाज़ के रूप में दर्ज है।

यही वजह है सम्भवतः कि प्रधानमंत्री मोदी तक से लेकर अमित शाह जैसे बड़े एवं दिग्गज नेताओं तक ने ट्वीट कर उन्हें जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ उनके स्वस्थ जीवन की कामना अपने-अपने ट्वीट में की है। लता एक ऐसी आवाज़ है जो सदियों में ही कभी एक बार गूंजती है। एक ऐसी आवाज़ जो किसी सन्नाटे को चीरती मानों रूहानी दस्तक दिल, दिमाग में भर जाती है। ठीक जैसे जीवन की तमाम आपाधापी में सुकून और तसल्ली के कुछ अनमोल पल। एक ऐसी बयार जो हमारी भावनाओं को अपने साथ ले उड़ती है। नूरज़हां और शमशाद बेग़म के दौर में 1947 की एक हिंदी फिल्म ‘आपकी सेवा में’ के एक गीत से साधारण सी शुरूआत करने वाली लता जी का पार्श्व गायन की दुनिया में प्रवेश सिनेमा की सबसे बड़ी और युगांतरकारी घटनाओं में से एक है।

बावजूद इसके विडंबना यह है कि उनकी आवाज़ को तब कई संगीतकारों ने यह कहकर खारिज़ कर दिया था कि उनकी आवाज़ बेहद पतली और उस दौर की नायिकाओं के लिए अनुपयुक्त है। एक अकेली नायिका मधुबाला थी जिन्हें लगता था कि लता जी की आवाज़ उनके लिए ही बनी है। उन्होंने फिल्में स्वीकार करने के पहले यह शर्त भी उस जमाने में रखी थी कि उन्हें अपने लिए लता की आवाज़ से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है। इसके बाद लता दीदी को अपार शोहरत मिली वह साल 1949 की फिल्म ‘महल’ के कालजयी गीत ‘आएगा आने वाला’ से। उसके बाद जो हुआ वह अब इतिहास में दर्ज है।

लता ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में उन्हें पहली बार गाना गाने के महज 25 रुपए मील थे। लेखक ‘यतीन्द्र मिश्र’ ने ‘लता सुर गाथा’ लता मंगेशकर के कई अनसुने, अनजाने पहलुओं के साथ एक मोटी सारी किताब भी लिखी थी। इस किताब के लिहाज से यह भी कहा जा सकता है कि लता मंगेशकर पर जब कभी ‘बायोपिक’ बनाई जाएगी तो इस किताब से भी सम्भवतः काफी कुछ जानकारी एकत्र की जाएगी। और जब कभी भी उनके रहते या उनके इस दुनिया से जाने के बाद भी अगर उन पर बायोपिक बनेगी तो सिनेमा तथा गीत-संगीत से जुड़े लोग चाहे वे बड़ी हस्ती हों या आमजन जरूर पसन्द करेंगे।

अपनी शालीन सी, नाज़ुक सी, मखमली सी और रूहानी सी आवाज़ से लता ने करीबन सात दशकों तक हमारी खुशियों, शरारतों, उदासियों, दु:ख, अकेलेपन और हताशा को अभिव्यक्ति दी है। प्रेम को सुर दिए हैं, व्यथा को कंधा है और आंसुओं को तकिया। तीस से भी ज्यादा भाषाओं में तीस हज़ार से भी ज्यादा गाने गाने वाली लता दीदी की संगीत के प्रति आस्था ऐसी थी कि रिकॉर्डिंग स्टूडियो में घुसने के पहले अपनी चप्पलें बाहर ही उतार देती थी। ऐसा उन्होंने खुद कई बार कई इंटरव्यूज में कहा है।

Unknown Facts About Lata Mangeshkar

हालांकि उन पर कई आरोप भी लगते रहे हैं मसलन उन्होंने अपनी ही छोटी बहन आशा भोंसले सहित अपने दौर की लगभग सभी गायिकाओं – शमशाद बेग़म, मुबारक़ बेग़म, गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर, सुधा मल्होत्रा तक का रास्ता रोका और अपनी मोनोपॉली चलाई ताकि वे अकेली एक ही फ़िल्म के सारे गाने गाएं। इस बात को सच भी माना जाए तो अगर वह दशकों तक ऐसा कर सकीं तो इसकी बड़ी वज़ह एकमात्र उनकी ही संगीत में राजनीति नहीं हो सकती।

उनके बारे में कभी देश के महानतम शास्त्रीय गायक रहे ‘उस्ताद बड़े गुलाम अली खा’ ने कहा था – ‘कमबख्त कभी बेसुरी ही नही होती।’ वहीं ‘उस्ताद अमीर ख़ान’ कहा करते थे कि ‘हम शास्त्रीय संगीतकारों को जिसे पूरा करने में डेढ़ से तीन घंटे लगते हैं, लता वह तीन मिनट मे पूरा कर देती हैं।’ जब पहली बार स्टेज पर उन्होंने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आंख में भर लो पानी’ गाया तो इसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘पंडित जवाहरलाल नेहरु’ तक के आंसू निकल आए थे। लतामंगेशकर आज भी एकमात्र ऐसी जीवित महिला गायिका हैं, जिनके नाम से संगीत के सबसे सम्मानित पुरस्कारों में एक ‘लता मंगेशकर सम्मान’ दिया जाता है। उस पीढ़ी को हमेशा गर्व रहेगा कि वह लता जी के दौर में पैदा, जवान और बूढ़ी हुई और उन्हें भी जिन्होंने कम से कम अपने बचपन या जवानी में उनके गाए गीतों को सुना।

लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों में अपने गानों से राज करने वालीं लता खुद के० एल० सहगल की आवाज की दीवानी थीं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किताब ‘सुर लता’ में लता मंगेशकर ने खुद को के० एल० सहगल का भक्त भी बताया है।

यतींद्र मिश्र की किताब ‘लता: सुर-गाथा : लता मंगेशकर की सांगीतिक यात्रा’ में गायका ने बताया कि उनकी के० एल० सहगल से कभी मुलाकात नहीं हुई। बकौल लता मंगेशकर, “मैं उनको नहीं मिल पाई। मैंने सहगल साहब की जो भी तस्वीर बनाई है, उसे फिल्मों में जा-जाकर देखने और उनके गानें सुनकर बनाई है। हमारा पूरा परिवार सहगल भक्त था। बचपन में जब मैं गाना सीख ही रही थी और पिताजी भी मौजूद थे, उसी समय से मेरे मन में यह बड़ी तीव्र इच्छा पल रही थी कि कभी मौका लगा तो सहगल साहब के साथ जरूर गाऊंगी।

Unknown Facts About Lata Mangeshkar

सहगल से जुड़ी अपनी अधूरी इच्छाओं के बारे में आगे वे बताती हैं, “अगर उनके साथ गा नहीं सकी, तो कम से कम उन्हें सामने से देखूंगी और अनुरोध करके कुछ जरूर सुनूंगी। अफसोस, कि मैं सहगल साहब को मिलने और देखने से वंचित रही हूं।”

‘बॉलीवुड लोचा’ टीम एवं मैं स्वयं तेजस पूनियां उनके जन्मदिन पर उन्हें अशेष शुभकामनाएं देता हूँ। साथ ही ईश्वर को धन्यवाद की उन्होंने एक ऐसा शरीर बनाया और उनमें ऐसी आवाज दी जो सदियों तक सुनी जाएगी। साथ ही फ़िल्म मेकरों से उम्मीद करते हैं हम कि लता दीदी पर भी वे बायोपिक बनाएं।

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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