Wednesday, January 19, 2022

रिव्यू: ये कैसी ‘डैथ वारंट’

हंगामा और एमएक्स प्लेयर पर साझा रिलीज हुई पांच एपिसोड की वेब सीरीज ‘डैथ वारंट’ के 20 मिनट के करीबन एपिसोड्स हैं। देखने से पहले पांच मिनट इस बॉलीवुड लोचा के रिव्यू को पढ़ लेंगे तो बेहतर रहेगा।

हमने-आपने सभी ने रक्तबीज की कहानी तो सुनी ही है। जी हाँ वही रक्तबीज जिसने शिवजी को प्रसन्न करके वर प्राप्त किया था। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि जहां-जहां उसके रक्त की बूंद गिरेंगी, वहां-वहा रक्तबीज की तरह ही शक्तिशाली दैत्य पैदा हो जाएंगे। देवताओं के साथ जब भी युद्ध होता तो जैसे ही किसी देवता के प्रहार से रक्तबीज के शरीर से रक्त बहता तो कई और रक्तबीज उत्पन्न हो जाते थे।

बस ऐसी ही कुछ ये सीरीज है। थोड़ा अलग है तो इतना ही कि इसमें किसी को वरदान नहीं मिला है। एक पहाड़ी इलाक़ा। जहां भेड़िया रहता है और ऐसा वैसा नहीं, वो जिसे काट ले वह आदमी भी भेड़िया जैसा व्यवहार करने लगता है। कुछ जंगल के सैनिक एक किसी बड़े आदमी के आने पर चिंता में है कि ऐसे समय में उस भेड़िये से कैसे उन्हें बचाया जाए। इधर एक आदमी उस भेड़िये के काट खाने पर आदमी के भेड़िया जैसा बन जाने का एंटी डॉट बना रहा है।

लेकिन जब ऐसी फिल्मों और सीरीज को देखते हुए हमें मालूम हो कि अंत में सब ठीक हो ही जाना है तो क्यों देखी जाए? सीरीज में एडिटिंग का काम जैसा किया गया है वैसा तो देखते हुए लगता है किसी कॉलेज , यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटर की पढ़ाई कर रहे बच्चे ही उससे बेहतर कर लें। एक्टिंग ठीक है थोड़ी बहुत, लिहाजा आप इसे झेल लेते हैं। कहानी उम्दा नहीं है लेकिन नकारी भी नहीं जा सकती। कारण इसका दूसरा सीजन में शायद पता चल सके।

सिनेमैटोग्राफी, स्क्रिप्टिंग, कैमरा, लुक, मेकअप, डायरेक्शन, वीएफएक्स आदि सभी विभागों में काफी कुछ सुधार की गुंजाइश भी यह सीरीज छोड़ जाती है। बैकग्राउंड स्कोर इन सबमें काफ़ी बेहतर रहा है। बात पुनश्च वही कि इस सीरीज का दूसरा सीजन भी आना है। इसलिए इसके पांच एपिसोड हो न हो एक तरह से एक्सपेरिमेंट के तौर पर रिलीज किए गए हैं।

मीर सरवर, आशुतोष सागर, राज शर्मा, यजुवेंद्र प्रताप सिंह, संजय सिंह, मोनिका चौहान, अमित अंतिल राहुल पटेल आदि अभिनीत तथा सागर नाथ झा द्वारा लिखी गई, स्क्रीनप्ले की गई यह सीरीज जब आप देखकर खत्म करते हैं तो स्वाभाविक हैं यह कह दें यह कैसी ‘डैथ वारंट’ भाई! एक बात और कुछ अच्छा है तो चंद लम्हों के लिए दिल दहलाने वाले एक दो सीन जो कि इसके बैकग्राउंड स्कोर और सभी की ठीक-ठाक एक्टिंग के चलते बन सके हैं।

अपनी रेटिंग – 2.5 स्टार

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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