Saturday, September 24, 2022

वेब रिव्यू : ‘अमित भड़ाना एल एल बी’ नाम ही काफ़ी है

पहली बात तो ये की मैं हमेशा से कहता आया हूँ कि सिनेमा में कभी भी कायदे से कोर्ट के सीन नहीं दिखाए गए। कुछ एक-दो फिल्मों को छोड़ भी दें तो अधिकतर जगह मजाक ही देखने को मिला है। खैर ‘अमित भड़ाना एल एल बी’ डिज्नी प्लस हॉट स्टार पर इस हफ्ते रिलीज हुई है। जी हां वही चिर-परिचित अमित भड़ाना यूट्यूबर। जिन्होंने यूट्यूब पर सनसनी युवाओं के बीच खास करके मचाई है। इसके अलावा हाल के यूट्यूबर को देखा जाए तो अमित भड़ाना युवाओं के बीच खासे पॉपुलर भी हैं। हमेशा हंसाने वाले अपने वीडियोज से अमित भड़ाना ने हंसाने का भी इस बार उसी चिर-परिचित अंदाज से किया है।

हास्य वीडियो बनाने वाले अमित भड़ाना अब वेब सीरीज लेकर आए हैं। यह भी हमेशा की तरह ही हास्य की चाशनी में लिपटी हुई है। एक आदमी की भैंस कोई चुरा ले गया तो ये वकील बने जनाब गोबर का डीएनए करके केस जीत गए। हमेशा अपनी गर्लफ्रैंड को रिझाने में लगे रहने वाला यह वकील अपने बॉस को बदल लेता है। बॉस क्यों बदला उसका पता तीन एपिसोड की इस छोटी सी सीरीज में देखिएगा।

फर्स्ट डिवीजन, फर्स्ट क्लास, फर्स्ट अटेम्प्ट अपने को कहने वाला यह वकील बेचारा कोई भी केस उठाता है तो उल-जुलूल ही सब मिलते हैं। जब ये खुद अजीब है तो केस भी वैसे ही अजीब अब देखिए जरा – एक ने ज्योतिषी पर केस कर रखा है। एक ने फेयरनेस क्रीम पर केस किया हुआ है। एक डिवोर्स का भी ऐसा ही केस। एक फोटोग्राफर का कैमरा छीनकर बंदर ने फोटो खींच लिया। अब उसके लिए अलग केस लड़ा जा रहा है। भाई ये कोर्ट है या मजाक। इतना ही नहीं एक और देखिए सीन- वकील के चैम्बर में कच्छे सूख रहे हैं। भाई सच कहें तो यह सीरीज नहीं आपकी हमेशा की वही नौटंकी ही है।

हास्य में लिपटी इस सीरीज को दूसरी नजर से देखें तो यह हमारे देश के वकीलों के सच और हालात भी दिखाती है। वकीलों को केस से अमूमन कुछ लेना-देना नहीं होता। उन्हें तो चाहिए बस अपनी जेबें भरने को। इसलिए ही वे तारीख पर तारीख देते रहते हैं। इस लिहाज से यह हमारे कोर्ट की वह सच्चाई भी दिखा जाती है जिसे देखकर आपको वकीलों और कोर्ट्स पर हंसी आने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। “वकील वो कील होती है जो एक बार हाथ में घुस जाए तो आसानी से निकलती नहीं है।” यह सच भी है कि ये चाहें तो क्या न कर दें। लेकिन सिर्फ हमारे या आपके चाहने से होता क्या है?

अब क्या यह सीरीज ऐसी ही नौटंकी करती है अपने तीन एपिसोड में? नहीं देखने वाले चाहें तो इसके अंदर की गहराई को भी देख सकते हैं।

अमित भड़ाना द्वारा क्रिएट की गई इस सीरीज के डायलॉग्स और कहानी को भी उन्होंने ही लिखा है। हालांकि कोई पंचिंग डायलॉग नहीं है। साथ ही यह पूरी तरह से आपको हंसाने में कामयाबी तो पाती है ही लेकिन उस गहराई को ठीक से समझा पाने में कामयाब होती नजर ठीक से नजर नहीं आती है। स्क्रीनप्ले, सिनेमैटोग्राफी ऐसी सीरीज में जैसी होनी चाहिए वैसी ही है। रवि वर्मा के निर्देशन में तैयार हुई इस सीरीज को देखना एक तरह आप अगर उदास, हताश बैठे हैं तो उसमें कुछ हंसी, खुशी के पल अवश्य ले आएगी।

एक्टिंग, बैकग्राउंड स्कोर औसत रहा है। कास्टिंग के मामले में यह मनोज जोशी जैसे मंझे हुए एक्टर्स की भी एक्टिंग का लाभ न ले पाई तो इसमें कमी आपकी है। गीत-संगीत ठीक है फिर भी। स्टेफी पटेल, हेमंत पांडेय, राजेश शर्मा, मिथिलेश चतुर्वेदी, हिताक्षी वधवा, मनोज बक्शी, सदानन्द पाटिल, गोविंद पांडेय, धीरज सूद जैसे एक्टर्स मिलकर भी सीरीज में दमखम न ला पाए तो इसका सारा दोष इसे लिखने वाले का ही है।

अपनी रेटिंग – 2.5 स्टार

Tejas Poonia
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लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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