Monday, October 25, 2021

नहीं रहे फ़िल्मी पर्दे के रावण ‘अरविंद त्रिवेदी’

Arvind Trivedi Passes Away: टेलीविजन की दुनिया में अपने अभिनय से कहर मचाने वाले रावण ‘अरविंद त्रिवेदी’ का 82 साल की उम्र में निधन हो गया। बॉलीवुड लोचा टीम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

एक समय था जब नब्बे के दशक में टेलीविजन पॉपुलर हो रहा था। और वजह एक यह भी थी कि रामानन्द सागर की रामायण छोटे पर्दे पर आई। यह धारावाहिक इतना हिट हुआ कि इस ‘रामायण’ में रावण का किरदार निभाने वाले एक्टर अरविंद त्रिवेदी अपने किरदार और अभिनय से हमेशा के लिए टेलीविजन एवं फिल्मी दुनिया में अमर हो गए।

वैसे भी फिल्मों या धारावाहिकों में बहुतेरे ऐसे कलाकार हैं जिनके एक डायलॉग की वजह से भी उन्हें याद रखा जाता है। फिर ये तो रावण अरविंद त्रिवेदी थे। ‘उफ़्फ़!!! वह रावण सरीखा अट्टहास, वह हुंकार, वह माता सीता का हरण, वह राम, रावण का युद्ध जो वे पर्दे पर हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर चले गए वे किसी भी फ़िल्म प्रेमी ही नहीं अपितु हर टेलीविजन देखने वालों के दिलों में वह हुंकार गूंजती रहेगी।’ रामायण में रावण के किरदार से खुद को विश्व प्रसिद्ध बनाने वाले ये कलाकार काफी समय से बीमार भी चल रहे थे।

Arvind Trivedi Passes Away

उनका जाना टीवी जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, जे०पी० नड्डा तक ने ट्वीट किए अपने अकाउंट से और श्रद्धांजलि अर्पित की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीती रात दिल का दौरा पड़ने से अरविंद त्रिवेदी का निधन हुआ था। उनके भतीजे कौस्तुभ त्रिवेदी ने उनके मौत की पुष्टि की। उनके निधन की खबर आने पर टीवी इंडस्ट्री में भी शोक का माहौल है और कई फिल्मी हस्तियों ने उनकी याद में ट्वीट भी किए हैं।

हालांकि इससे कुछ महीने पहले ही अरविंद त्रिवेदी के निधन की झूठी खबरें भी आईं थी। उज्जैन में जन्में अरविंद त्रिवेदी ने गुजराती मंच से अपने करियर की शुरुआत की थी। और उन्होंने कई गुजराती फिल्मों में भी अभिनय किया किया। अपने अभिनय के चलते वे गुजराती दर्शकों के बीच भी काफी मशहूर रहे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में लगभग 300 हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया। और फिल्मों ही नहीं बल्कि राजनीति में उतरे। उन्होंने गुजरात के साबरकांठा लोकसभा सीट से भाजपा की ट‍िकट पर चुनाव लड़ा था। और उनके चुनावी कैंपेन में ‘राम मंद‍िर’ का मुद्दा भी अहम था।

राजनीति में रहते हुए एक बार भाषण देते हुए मंच से उन्होंने कहा था। ‘राम का विरोध करने का पर‍िणाम मुझसे बेहतर कौन जान सकता है।’ उनका इतना कहना भर था कि रावण के किरदार पर पहले से अपना दिल हार चुकी जनता एक बार फिर ‘रावण’ के भाषण से मंत्रमुग्ध हो गई।

चुनावों में दिलचस्प बात ये थी कि अरव‍िंद की टक्कर महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी से थी। एक ओर रामायण के रावण और दूसरी ओर महात्मा गांधी के पोते। दो दिग्गज शख्स‍ियत के बीच जनता ने अरव‍िंद को अपना राजा चुना और चुनाव में ‘रावण’ ने अपनी जीत दर्ज की थी।

साल 1998 में एक गुजराती फिल्म ‘देश रे जोया दादा परदेश जोया’ में वे आखरी बार काम करते हुए नजर आए थे। साथ ही उन्हें कई सम्मानों से भी नवाजा गया। अब जब वे इस दुनिया से चले गए हैं तो बॉलीवुड लोचा टीम उनकी आत्मा की शांति के लिए राम एवं उनके रावण के किरदार आराध्य देवों के देव महादेव शिव से प्रार्थना करती है कि वे फिल्मी पर्दे के रावण को अपने श्री चरणों में स्थान दें।

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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