Wednesday, January 19, 2022

रिव्यू: शौक़ीनों के काम की है ये तो ‘ओ रे साजन’

इस दुनियां के बनने से लेकर इस दुनियां के क़ायम रहने तक शौक़ के कई किस्से आपने-हमने देखे, सुने औरों से भी बांटे। देवी-देवताओं से लेकर, सुर-असुर सभी के शौक़ रहे हैं। राजा-महाराजों के शौक़ से भी दुनिया पूरी तरह वाकिफ़ है। और भला किसी इंसान के कोई शौक़ न हो तो वह आदमी ही क्या? है न!

किसी का शौक़ पढ़ने का, किसी का पढ़ाने का, किसी का खाने का, किसी का सोने का, किसी का देखने का, किसी का अजीब चीजें जोड़ने का, किसी का शादी के पहले और बाद में भी अफेयर्स चलाने तक के शौकीनों के भरपूर किस्से इस दुनियां में दफन हैं।

जयपुर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाई गई ‘ओ रे साजन’ फ़िल्म भी उन्हीं सब तरह-तरह के शौक़ रखने वालों के लिए एक पुरसुकून अहसास देने वाली फ़िल्म है। एक बाप जिसका दिल में अटका है। एक मां जो खुद तैयार नहीं रहती दूसरियों को सजाती-संवारती रहती है। तो ऐसे करोगे तो भाई पति तो इधर-उधर भागेगा ही बेलगाम घोड़ों की तरह दौड़ते हुए को जब उसके बेटे ने देख लिया तो वह नाराज रहने लगा। कुछ दिन बाद पता चला बेटे के अनूठे शौक़ का। फिर हल्की सी मुस्कान बराबर बनाए रखने वाली इस फ़िल्म की कहानी ने क्या करवट ली वह तो आप बाद में कभी देख सकें तो देखिएगा।

movie review o're saajan

मुस्कान देने वाली यह फ़िल्म बराबर अपने भीतर से उन शौक़िया लोगों के बारे में दिखाती-बताती ही नहीं बल्कि कुछ ऐसा आपको दे जाती है कि आप चटखारे लेकर अपने-अपने शौक़ की भी दूसरों से बातें करने लगें। इस बीच आप या कोई और शोखियाँ भी बघारने लगे तो अचंभित न होइएगा।

फ़िल्म की स्टार कास्ट का काम फ़िल्म की कहानी के अनुरुप ही चुलबुला सा लगता है। ‘सहर्ष शुक्ला’ लुभाते हैं। ‘मुक्ता सिंह’ साधारण, सिंपल हाउस वाइफ बनकर आपको अपनी ओर खिंचती है। ‘मीनाक्षी चानणा’ मोहती है। ‘अथर्व गुप्ता’ प्यारे लगते हैं। एडिटर, सिनेमैटोग्राफर, कैमरामैन, कहानी लिखने वाले तथा निर्देशक, प्रोड्यूसर्स सहित सभी ऐसी प्यारी फिल्मों के लिए तालियां बजाने के अधिकारी तो हो ही जाते हैं।

ऐसी फिल्में फेस्टिवल्स में इनाम भले जीते न जीते लेकिन फेस्टिवल्स में हंसी-खुशी का खुशनुमा माहौल जरूर अपनी चमक से बिखेरती हैं। क्यों कि भाई ये शौक़ बड़ी ऊंची चीज है। लखनवी अंदाज की, लखनवी फ़िल्म में लखनवी शौक़ देखकर आनन्द उठाइयेगा और अपने शौक़ की भी थोड़ी शौखियाँ बघारियेगा।

अपनी रेटिंग – 3.5 स्टार

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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