Saturday, September 24, 2022

रिव्यू : इश्क के प्रेम गेम का ‘जादूगर’

पंचायत वेब सीरीज से प्रसिद्धि हासिल करने वाले जितेंद्र कुमार की एक और फिल्म नेटफ्लिकस पर आज रिलीज हुई है पढ़ें बॉलीवुड लोचा पर फिल्म ‘जादूगर’ का रिव्यू और आप भी सिनेमा से जुड़े लेख, इंटरव्यू, रिव्यू आदि भेजना चाहें तो तो हमारे फेसबुक पेज को लाइक, फॉलो अवश्य करें। तो चलिए शुरू करते हैं

फिल्म की कहानी

इस दुनियां की असल जिंदगी में कई जादूगर हुए हैं इसलिए ही हिंदी सिनेमा ने भी सम्भवत: जादूगर के इसी जादुई कमाल को दिखाने के लिए अपनी पर्दे की जादूगरी का इस्तेमाल किया है। नीमच जैसे छोटे से शहर में जन्मा एक बच्चा जिसके जीवन का लक्ष्य है कुल्फ़ीवाला बनना तो कभी दूल्हा लेकिन असल में फुटबॉल खेलने वाले उसके बाप ने गली-मोहल्ले के फुटबॉल मैच में उसे खेलने देखने की इच्छा है और बस उस ट्रॉफ़ी को वे एक बार जीतना चाहते हैं। लेकिन उसके बेटे मीनू को फुटबॉल से चिढ़ है फिर एक दिन अपने प्यार को पाने के लिए उसे फुटबॉल खेलने उतरना पड़ता है मैदान में।

क्या उनकी टीम ट्रॉफी जीतने में कामयाबी पा सकी? क्या मीनू ने अपना प्यार हासिल किया? क्या वह एकल्वय बन पाया? लेकिन इन सबके बीच फिल्म केवल खेल पर ही पूरी तरह टिक कर रह जाती है इसकी अतिशय लम्बाई दिलों को जीतने में कामयाबी हासिल नहीं कर पाती। लिहाजा मीनू को अपने जीवन में कई प्यार भी मिलते हैं लेकिन सब उससे दूर होते चले जाते हैं।

Jaadugar Movie Download
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फिल्म के निर्देशक ‘समीर सक्सैना’ ने इससे पहले कई फिल्मों में हाथ आजमाया है। उनके चर्चित कामों में ‘ये मेरी फैमिली’, ‘पंचायत’ , ‘मिस्टर एंड मिसेज’ , ‘गुल्लक’ आदि हैं जिनमें वे बतौर निर्देशक, निर्माता रह चुके हैं। लेकिन जब इतने अच्छे सिनेमा देने वाले निर्देशक अपनी ही फिल्म ‘जादूगर’ से वो सिनेमाई जादूगरी न दिखा पाएं तो निराश होना बनता है।

फिल्म का सबसे बड़ा ‘बॉलीवुड लोचा’ इसकी लम्बी लाइन लेंथ ही नहीं बल्कि शुरुआत से ही हल्का पन इसे भटकाने लगता है जिसे सम्भालते समय शायद न एडिटर ध्यान दे पाए और न इसकी कहानी लिखने वाले ‘बिस्वपति सरकार’

बजट के हिसाब से फिल्म की कास्टिंग अच्छी

फिल्म में जीतेंद्र कुमार हमेशा की तरह उम्दा काम करते ही नज़र नहीं आते बल्कि वे हर भाव को भी बखूबी पकड़े नज़र आते हैं। ‘जावेद जाफ़री’ भी उम्दा जन्चे। ‘आरुषी शर्मा’ भी अपने किरदार में रची बसी नज़र आई। स्पोर्टिंग एक्टरों ने भी अपना बेहतर देने का प्रयास किया। कास्टिंग वालों ने कास्टिंग जरूर फिल्म के बजट के हिसाब से रखने में कामयाबी पाई है।

गीत-संगीत दो एक गानों को छोड़ न भावुकता जगाता है न ही फिल्म को पूरी देखने की हिम्मत देता है। ओटीटी और सिनेमाघरों में इस हफ्ते आई सिनेमाई बाढ़ के बीच यह फिल्म धीरे धीरे अपना स्थान तो बना ही लेगी। बैकग्राउंड स्कोर, लुकअप, सिनेमैटोग्राफी सभी में कुछ कम तो कुछ ज्यादा परोसती इस फिल्म को घरों में बैठकर आप अपने इस वीकेंड में कुछ हंसी ला सकें तो यह इस जादूगर का कमाल कहा जाएगा। कुछ भाव जगा पाएं प्रेम के अपने भीतर तो इस जादूगर की सफलता कही जाएगी। अन्यथा बस ठीक ठाक है और लम्बी बहुत है फिल्म कह कर आप अपने कामों में लग जाएं तो गलत नहीं होगा।

अपनी रेटिंग – 2.5 स्टार

Tejas Poonia
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लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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