Wednesday, January 19, 2022

रिव्यू: नये सिनेमा की मजबूत आशिक़ी ‘चंडीगढ़ करे आशिक़ी’

इस हफ्ते सिनेमाघरों में आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर की फ़िल्म आई है। जो समाज की सोच बदलती है और सिनेमा को एक नया आयाम मजबूती के साथ नये सिनेमा, प्रगतिशील सिनेमा के रूप में देती है। बॉलीवुडलोचा आपके लिए लाया है ‘चंडीगढ़ करे आशिक़ी’ फ़िल्म का रिव्यू।

इंसानों का पुरुष या स्त्री होना डिसाइड करता है। शरीर नहीं फ़िल्म का एक यह संवाद ही फ़िल्म की ही नहीं समाज की नींव भी तय कर देता है। बदलते समय के साथ सिनेमा और समाज दोनों बदल रहे हैं। जिसमें मजूबत आधार बनकर आ रही है ऐसी फिल्में। जिनका स्वागत किया जाना चाहिए। ऐसी फिल्में समाज की उस दकियानूसी और रूढ़िवादी सोच को भी मजबूती से तमाचा मारते हुए नये सिनेमा की, नये समाज की मजबूत आशिक़ी वाली दीवार भी बनाती है।

फिल्म की कहानी है मनविंदर उर्फ मनु यानी आयुष्मान खुराना की। जो फिटनेस फ्रीक होने के साथ-साथ एक जिम का मालिक भी है। जिम में ही वह साल से बॉडी बिल्डर बनने की तैयारी कर रहा है। साथ ही जिम का बिजनेस भी अच्छा नहीं चलने की वजह से परेशान भी है। इसी बीच मानवी बरार यानी वाणी कपूर की एंट्री होती है।

मानवी भी फिटनेस फ्रीक है और खूबसूरत भी। मनु को वाणी से प्यार हो जाता है। उनके बीच सम्बन्ध भी बनते हैं। लेकिन मानवी की जिंदगी में खूबसूरती से ज्यादा कुछ स्याह रातें भी गुजर चुकी हैं। अब क्या होता है उनके बीच और क्यों बनती है यह नये सिनेमा की मजबूत आधार जानने के लिए फ़िल्म देखनी होगी।

chandigarh kare aashiqui movie download

इस फ़िल्म के निर्देशक अभिषेक कपूर ने ‘काईपोचे’ और ‘रॉक ऑऩ’ जैसी बेहतरीन फिल्में देने के बाद अब ‘चंडीगढ़ करे आश‍िकी’ में भी अपने उसी बेहतरीन परफॉर्मेंस को दोहराया है। फ़िल्म का निर्देशन इतना प्यारा लगता है मानों जैसे उसे बड़े ही करीने से एक खास मुद्दे को बिना ज्यादा मसाले मिलाए हल्की-फुल्की कॉमेडी के जरिए सही, सटीक संदेश दिया गया है। हालांकि उस सन्देश को यह फ़िल्म हल्के से छू कर निकल जाती है। किसी तरह का बेवजह भाषण नहीं देती।

बढ़िया और सॉफ्ट डायलॉग पंचिंग के जरिए फिल्म कहीं भी आपको बोर होने नहीं देती है। फिल्म के जरिए से फ़िल्म की पूरी टीम उन तमाम ट्रांसजेंटर महिलाओं की व्यथाओं को भी रुपहले पर्दे पर लाने की सफल कोशिश करती है। जिसके बारे में समाज कभी ध्यान नहीं देता है। और उन्हें हमेशा से तीसरे नंबर पर रखता है। भले ही उन्होंने कितना ही समाज की सोच को बदलने में अपना सार्थक योगदान दिया हो। फिर भी वह उन्हें नफरत की ही दृष्टि से देखता है। यदि आप एक अलग तरह की फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो यह फ़िल्म आपके लिए ही है।

बॉलीवुड की ज्यादातर लव स्टोरी में लड़का-लड़की का मिलना उनके बीच थोड़ा सा रोमांस, थोड़ा सा संघर्ष, झूठ-मूठ का ब्रेकअप और फिर सब कुछ अंत में ठीक हो जाने जैसी कहानियां दिखाई जाती रही हैं। लेकिन ये फिल्म इन सबसे थोड़ा हटकर सामने आती है। साथ ही उन तीसरे दर्जे के लोगों के मान-सम्मान की रक्षा भी करती है।

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एक्टिंग के मामले में आयुष्मान खुराना बेहतर रहे। वाणी कपूर भी उनका भरपूर सहयोग देती है। आयुष्मान खुराना लीक से हटकर जब भी फिल्में चुनते हैं तो वे अपने को खरा साबित करते हैं। मनु (आयुष्मान) के जुड़वा भाईयों ने भी दिल जीता है। ‘कंवलजीत सिंह’, ‘गौरव शर्मा’, ‘गौतम शर्मा’, ‘अंजन श्रीवास्तव’ सब फ़िल्म को मजबूती देते हैं।

कहानी का स्क्रीनप्ले और हर सीन आपको बांधे रखता है। सीन हंसाते भी हैं तो संजीदा भी करते हैं। सचिन-जिगर का संगीत सुनने में अच्छा लगता है।सिनेमेटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर, फ़िल्म का लुक, लोकेशंस सब अच्छा है।

हिंदी सिनेमा में तेजी से ऐसी समाज की सोच बदलने वाली फिल्में अब लगातार तेजी से सामने आ रही हैं। स्वागत कीजिए ऐसे प्रगतिशील सिनेमा का, नये सिनेमा का। ऐसी फिल्में आपको मनोरंजन तो देती ही हैं साथ ही आपकी सोच को एक कदम ओर आगे ले जाने का हुनर भी रखती हैं। हिंदी और पंजाबी के इसके संवाद असरदार जरूर साबित होंगे। सिनेमा तो बदल ही रहा है समाज भी जरूर बदलेगा एक दिन। ऐसी फिल्मों को देखा ही नहीं बल्कि दिखाया भी जाना चाहिए।

अपनी रेटिंग – 4 स्टार

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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