Monday, October 25, 2021

जो रचेगा वो बचेगा कहते हैं गीतकार ‘कबीर शुक्ला’

कबीर शुक्ला पंजाब के रहने वाले हैं। लिरिक्स लिखने के अलावा अभिनय, निर्देशन में भी हाथ आजमाते रहे हैं। शिव के भक्त भी हैं। लिहाजा हंसराज रघुवंशी बाबा जी के नाम से मशहूर गायक के साथ दो महीने पहले आया गाना ‘भोले शंकर’ खासा चर्चित रहा। अब एक और गाना कल रिलीज हो रहा है ‘नमो नमो शिवाय’ उसी सिलसिले में पढ़िए बॉलीवुड लोचा टीम के साथी तेजस पूनियां के साथ हुई अंतरंग बातचीत के कुछ अंश

सवाल – लिरिक्स लिखने की शुरुआत कहां से और कैसे हुई?

जवाब – मेरी पढ़ाई ही सारी इसी में हुई है। मैंने ग्रेजुएशन बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड थियेटर में की है, तो एक तरह से बचपन से ही मैं इस लाइन में हूं। और स्कूल में भाग (पार्टिसिपेट) लेते रहे। 12 वीं के बाद मैंने थिएटर ही सब्जेक्ट चुना; उसी की पढ़ाई की। तो उसमें ही आप जानते ही हैं कि अभिनय करना होता है और अभिनय के साथ ही सब अपने आप आता रहता है। आप सीखते चले जाते हैं। क्लास में भी पटकथा लेखन करना होता था। इंटरेस्ट हर किसी का होता है शुरू से और लिखने का अपना एक शौक होता है। उस शौक के साथ-साथ ये सब जो अपने आप हो रहा है। वह मैं तो नहीं कर रहा, वह खुद ही हो रहा है।

सवाल – अभी तक कुछ गाने आए हैं उनमें पंजाबी गाने भी आए हैं शायद?

जवाब – मन बावरिया गाना आया है एक पंजाबी। जो टिकटॉक जब हमारे यहां था। उस समय आया था। तो टिकटॉक पर आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वह गाना 200 मिलियन के लगभग क्रॉस कर गया था। वह ट्रैक काफी वायरल हुआ था। यूट्यूब पर भी वह अब तक 17 मिलियन से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। यह मेरा तीसरा गाना कल रिलीज होगा और इसके साथ ही चौथा गाना अभी तैयार हो रहा है।

सवाल – यह चौथा गाना क्या है भक्ति या कुछ और?

जवाब – जी वो चौथा गाना दरअसल पंजाबी टप्पे हैं। जो पंजाब का फॉक होता है, लोकगीत कहते हैं जिसे। तो मेरी कोशिश है कि वह भी बाबा जी के साथ ही आए, अभी तैयार हो रहा है। उसके अलावा एक और भी तैयार हो रहा है, वह भी बाबा जी के साथ ही आएगा। वह तैयार हो चुका है लेकिन उसे आने में अभी चार-पांच महीने लग जाएंगे।

सवाल – आपकी रूचि किस तरह के गाने लिखने की है पंजाबी, भक्ति हिंदी या कुछ और?

जवाब – लिखने का शौक तो है। वह किसी भी तरह का हो सकता है। लिखना पसंद है। अब अगर भक्ति में मुझे मौका मिला, मैं खुद जैसे ब्राह्मण परिवार से हूं। तो बचपन से ही वह सब चीजें कितना कुछ ऐसा आप के आस-पास होता है। पढ़ाई किस्म-किस्म की किताबें। किताबें तो पहला प्यार हैं। उनके साथ-साथ यह चीजें निखरती जाती हैं। जिसकी रीडिंग अच्छी होगी, उसके लिखने के स्किल यानी कला भी उतनी ही अच्छी होगी और होती जाएगी। लिख कोई भी सकता है। मैं क्लासें भी देता रहता हूं कि कैसे और क्या लिखा जाए। स्क्रिप्ट राइटिंग की वर्कशॉप की तो वहां बहुत से स्टूडेंट आए। तो मेरा मानना है कि लिख हर कोई सकता है। अगर मैं कहूं मेरी माता लिखना चाहें तो वो भी लिख सकती हैं। और जो घरों में बैठे हैं जिन्होंने कुछ नहीं किया वो भी लिख सकते हैं। बस बात यह है कि अपने मन को समझना पड़ता है।

सवाल – बाबा जी ‘हंसराज रघुवंशी’ के साथ कैसे सफर शुरू हुआ? यह शुरुआत कैसे और कहां से हुई?

जवाब – बाबाजी के साथ हमारा जो पहला गाना ‘भोले शंकर’ था। उसके लिए हमने पहले एक डमी बनाई और हमने कोशिश की बाबा तक पहुंचाने की। उसमें हमने अपने लिंक निकाले, जो हिमाचल के हैं और जो हमारे लिंक में हैं। तो वहां से ये सब हुआ। जैसे इंडस्ट्री में तो है ही हम लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इंडस्ट्री में हो कर भी कोई नहीं होता। जैसे हम उन तक नहीं पहुंच पाते तो फिर उन तक यानी बाबाजी तक गाना पहुंचाया। उन्हें गाना सुनते ही पसंद आ गया। बस इस तरह हम जुड़ गए और इसके बाद बात तो लगातार आप देख ही रहे हैं। और आगे भी हमें देखते रहेंगे साथ में।

Kabeer shukla

सवाल – आपने अभी कहा इंडस्ट्री में रहते हुए भी हम इंडस्ट्री वालों तक नहीं पहुंच पाते तो किस तरह वहां कोई पहुंच सकता है?

जवाब – बहुत मुश्किल होती है। जैसे अब मुझे ही लीजिए। मैं हूं, मेरे साथ एक और राइटर है। मैं उसे जानता हूं। मान लीजिए जैसे वह नेहा कक्कड़ के साथ काम कर रहा है, तो होता यह है कि हम दोनों ही एक बाजार की तरह खड़े हैं। अब आप इस चीज को समझ सकते हैं। यह सब एक बाज़ार बन गया है। इसमें बाजार है। तो एक प्रतियोगिता सी शुरू हो जाती है और हमारे अच्छे लोग होंगे या कोई अच्छा आर्टिस्ट होगा तो वह अपना लिंक देने से कभी नहीं डरता। और अगर जैसे कोई गलती से पहुंच जाता है वहां तक किसी तरह तो उनमें अभिमान बहुत रहता है और जो थोड़े ज्यादा चमक गए हैं। वह जिन्हें कला का पता भी नहीं है। साथ में आजकल के दर्शक भी ऐसे हो गए हैं। जो किसी को भी स्टार बना सकते हैं। तो इन सब में एक अच्छा कलाकार बहुत दबा हुआ है। उसे निकलने में वक्त लग रहा है।

सवाल – आपकी थिएटर में भी रुचि है आपने बताया। आपने थिएटर भी किया है लेकिन क्या कभी किसी फिल्म या टीवी सीरियल में काम करना चाहेंगे?

जवाब – अभी तक मैंने फिल्म में काम नहीं किया है। क्योंकि कहते हैं कि एक-एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए। एकदम से आप अगर छलांग लगाएंगे तो आप गहरे गिर भी सकते हैं। तो यह है कि धीरे-धीरे ही सही चलते रहो। चरैवेति-चरैवेति…! और लिखने का काम मुझे महसूस हुआ यह अच्छा है। मेरे जो क्लासमेट हैं। उनमें मेरा सबसे अच्छा यार है ‘डी० जे स्ट्रिंग्स’ (आरुष)’ जिसने म्यूजिक किया है मेरे साथ। रियलिस्टिक दोस्त जिसे मैं कहूँ। हम पहले दिन से दोस्त हैं और आज भी हमारी जोड़ी बनी हुई है। वह म्यूजिक बनाता है, मैं लिखता हूं। यह हमारी जोड़ी होने का सबूत भी है कि हम क्लास के पहले दिन से अब तक साथ हैं और इसी तरह हम इंडस्ट्री में आगे भी साथ ही मिलकर बहुत सारा काम करें। अभिनय में मुझे अभी भी मौका मिलता है तो मैं थिएटर में काम करता हूं। अगर मुझे लगता है कि यह एक अच्छी कहानी है या अच्छा प्ले हो सकता है तो मैं करता हूं। इसके साथ ही मैंने एक प्ले भी डायरेक्ट किया हुआ है। कुछ अवार्ड भी उस डायरेक्शन के लिए जीते थे।

सवाल – लेखकों के लिए आपका संदेश किस तरह का लेखन हो?

जवाब – मैं यही कहना चाहूंगा कि जो भी लिख रहा है, रच रहा है कुछ लेखनी से सार्थक वही बचा हुआ है और बचा रहेगा। लेकिन वह उसे लिखने के साथ-साथ नरेट भी जरूर करें। यूट्यूब आज एक बहुत बड़ा जरिया है। आप उसे अगर कहीं नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो आप उसे यूट्यूब तक तो पहुंचा ही दो। अगर नरेट किया हुआ आपका कुछ भी यूट्यूब तक पहुंचता है, तो वहां से कुछ भी वायरल हो सकता है। उससे होने वाली जो कमाई है उसका भी किसी को कोई आईडिया नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही ऐसा हुआ कि मुझे एक रिक्शे वाले का लड़का मिला उसने 6000 का फोन लिया और लगातार वीडियो बनाने लग गया। कहीं भी कुछ भी जो उसे लगता अपने यूट्यूब पर डाला जा सकता है। वह उसे डालने लग गया। उसके बारे में मैंने जो सुना उसने 2 महीने के अंदर ही अपना यूटयूब मोनेटाइज भी कर लिया और 20 से 25000 रुपए लेने का, कमाने का हकदार भी हो गया। तो एक जो रिक्शे वाले का लड़का है जिसे 6000 की कीमत का पता था। उसने उस 6000 से 25000 बनाया तो हमें लिखने के साथ-साथ अपडेट रहना बहुत जरूरी है कि हमारे आसपास चल क्या रहा है। अपडेट रहेंगे अगर तो सब धीरे-धीरे अपने आप होता चला जाएगा। जो अपडेट रहेगा वह कलाकार कभी खत्म नहीं हो सकता। एक बार मैंने लिखा था –

मंजिल की तरफ चले हैं
राहों में रुक-रुक कर
जहां भी हम रुके हैं
वो भी किसी की मंजिल है।।

तो इसलिए मुस्कुराइए और कभी हौसला मत छोड़िए। जो आपको मिला है कईयों को वो भी नसीब नहीं होता।

सवाल – कबीर को क्या पसंद है?

जवाब – अभी के समय की बात करूं तो… जिनसे मैं सबसे ज्यादा प्रभावित होता हूं तो वह है मनोज मुंतशिर। उनका लेखन मुझे बहुत पसंद है। वहीं आवाज की बात करूं तो अरिजीत सिंह मुझे बहुत पसंद है, सभी को पता है और नहीं तो अपने बाबा जी के नाम से ही मशहूर हंसराज रघुवंशी जी बहुत पसंद है।

‘बॉलीवुड लोचा’ टीम गीतकार कबीर शुक्ला एवं उनकी टीम के सभी साथियों को शुभकामनाएं देती हैं। साथ ही यह उम्मीद करती है कि इसी तरह वे प्यारे-प्यारे गीत चाहे भक्ति के हों या लोकगीत हों या पंजाबी लिखते रहें। क्योंकि जो रचेगा वो बचेगा।

Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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