Sunday, June 20, 2021

वेब रिव्यू-‘तीन दो पांच’ में मस्तियां और इमोशंस

Teen Do Paanch Review: बच्चे गोद लेने चाहिएं या नहीं? और लेने के बाद अगर अपने बच्चे हो जाएं तो क्या उन्हें वापस छोड़ आना चाहिए? यह फिल्म इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती एक परिवार की ज़िंदगी को दिखाती है। जी हां, है तो यह पौने दो घंटे की एक फिल्म ही लेकिन थिएटर बंद हैं सो इसे डिज़्नी हॉटस्टार पर रिलीज़ किया गया है और फिल्मों की हालत इन दिनों मंद है सो इसे छोटे-छोटे 13 एपिसोड में काट कर बांटा गया है।

Teen Do Paanch Review

शादी के सात साल तक भी संतान नहीं हुई तो पत्नी प्रियंका के कहने पर विशाल अनाथाश्रम से चार साल की एक बच्ची को गोद लेने पर राज़ी हो गया। लेकिन इस बच्ची के दो और हमउम्र भाई भी हैं। असल में ये तीनों ट्रिप्लेट्स हैं और अनाथाश्रम वालों की शर्त है कि तीनों को एक ही परिवार में भेजेंगे ताकि भाई-बहन जुदा न हों। सो, अब ये तीनों विशाल-प्रियंका के बच्चे हैं। प्रियंका खुश है लेकिन विशाल परेशान। तभी पता चलता है कि प्रियंका मां बनने वाली है। और लो जी, इनके हो गए जुड़वा बच्चे। अब ये दोनों इन तीन-दो-पांच बच्चों को कैसे संभालें…? तो क्या इन्हें वापस छोड़ आएं…?

Hot Star Comedy Series Teen Do Paanch Review

कहानी अलग है, दिलचस्प है, भावनाओं से लबरेज़ है लेकिन इसे फैलाते हुए यह बार-बार लेखकों के हाथ से फिसली है, गिरी है और इसी वजह से इस पर पड़े हुए डेंट साफ दिखाई देते हैं। तीन बच्चों के परिवार में आ जाने के बाद जिस किस्म की शरारतें, मस्तियां, परेशानियां आनी चाहिए थीं, लेखक उन्हें खुल कर नहीं दिखा सके। यह तो निर्देशक अमिताभ वर्मा की कुशलता रही कि उन्होंने कहीं बोर नहीं होने दिया और जैसे-तैसे सीन संभालते चले गए। अंत आते-आते फिल्म इमोशनल करती है और इसका अंत जल्दबाज़ी का नतीजा लगने के बावजूद अच्छा लगता है।

किरदारों को गढ़ने में लेखकों ने मेहनत की है। संवाद कई जगह बहुत अच्छे हैं। खासतौर से हीरो के दोस्त कार्तिक का किरदार और उसमें शांतनु अनम की एक्टिंग, दोनों लाजवाब रहे हैं। श्रेयस तलपड़े और बिदिता बाग ने अपने किरदारों को जी भर कर रियल बनाया है। अंत में तो ये दोनों ही अपनी अदाकारी से खासा प्रभावित करते हैं। कुछ देर

Teen Do Paanch Review

को आने वाले अखिलेंद्र मिश्र, लवलीन मिश्र, शीबा चड्ढा, बृजेंद्र काला, गुरपाल सिंह, आकाशदीप अरोड़ा आदि कायदे से सपोर्ट करते हैं। गीत-संगीत थोड़ा और मज़बूत होना चाहिए था।

इन एपिसोड्स को देखने के लिए यहां क्लिक करें

(रेटिंग की ज़रूरत ही क्या है? रिव्यू पढ़िए और फैसला कीजिए कि सीरिज़ कितनी अच्छी या खराब है। और हां, इस रिव्यू पर अपने विचार ज़रूर बताएं।)

Deepak Dua
(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज़ से घुमक्कड़। अपने ब्लॉग ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य हैं और रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)

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