Saturday, September 24, 2022

रिव्यू : अच्छे से काटती है आपका ‘कटपुतली’ जैसी फ़िल्में

फिल्म रिव्यू ‘कटपुतली’ (Movie Review Cuttputli)

हिमाचल का एक शहर कसौली। जहाँ आए रोज कम उम्र की स्कूली लड़कियों का अपहरण होता है और दो दिन बाद मिलती है उनकी लाशें। वो भी सरे बाजार या किसी ख़ास तरह के सिग्नेचर स्टाइल के साथ। और मिलता है एक गिफ्ट बॉक्स जिसमें एक गुड़िया का केवल धड़ रखा मिलता है। दूसरी तरफ एक नौकरी की अधिकतम आयु सीमा पार करने की दहलीज पर खड़ा लड़का जिसे बनानी है सीरियल किलर पर फिल्म। जिसके लिए वो सालों से मेहनत कर रहा है। इधर उसके बाप की जगह मिलती है उसे हिमाचल पुलिस में नौकरी। जहाँ वह असल में हिमाचल में हो रहे सीरियल किलर की जांच करने में जुट जाता है। फिर एक दिन उसी के परिवार की बच्ची अब है उस सीरियल किलर के निशाने पर। क्या होगा आगे?

क्यों है न मजेदार किस्सा? मर्डर, मिस्ट्री, सस्पेंस और खूब सारे थ्रिल किसी फिल्म में हों और साथ में हो ‘द अक्षय कुमार’ तो लोग तो देखेंगे ही न? लेकिन ठहरिये… रुकिए जरा… सब्र कीजिए… इससे पहले की आगे कुछ कहूँ ये सुन, पढ़, देख लीजिए। क्या आपने सुना, देखा, पढ़ा कभी इस बारे में? कि साल 2018 में रामकुमार निर्देशित सुपरहिट तमिल फिल्म आई ‘रतसासन’ जिसका हिंदी में अर्थ होता है ‘दानव।’ जिसे 20194 में तेलूगु में ‘रक्षासुडु’ और अब 2022 में ‘कटपुतली’ नाम से हिंदी में बनाया गया है। तमिल फिल्म ने कई सारे ईनाम भी अपने नाम किये थे।

Cattputli Movie Download Leaked By Telegram, Tamilrockers
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अगर आपका जवाब हाँ है तब आप इस फिल्म को न देखें। बल्कि इस रिव्यू को भी आगे ना पढ़ें क्योंकि अगर आपने उस ‘रतसासन’ को देखा है जिसने सस्पेंस, थ्रिल के सभी मसाले आपकी सिनेमाई थाली में सजाए थे तो आप इस ‘कटपुतली’ को देखकर अपना कटवाने वाले हैं। फिल्म पर फिल्म भाई ये बंदा है क्या? इसके अलावा इंडस्ट्री में कोई और हीरो बचा ही नहीं है? इस साल की चौथी फिल्म है अक्षय कुमार आपकी।

इसी 2 सितम्बर को डिज्नी प्लस हॉट स्टार पर आई इस फिल्म में जिस साइको किलर फ़िल्म बनाने के इच्छुक अर्जन सेठी नाम के फिल्म मेकर को दिखाया गया है उस पूरी सवा दो घंटे लम्बी फिल्म में आपको मात्र दस मिनट के लिए थ्रिल या साइको जैसा अहसास हो और बाकी पूरी फ़िल्म की कहानी बस उन दस मिनट को खड़ा करने में जुटी हो तो ऐसी फ़िल्म में कौन सा साइको का इतना बड़ा मसाला आपने डाल दिया निर्देशक साहब? एक तो ये रीमेक रीमेक खेलना बंद कीजिए आप बॉलीवुड में बैठे महान हस्तियों।

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कब तक आखिर आप रीमेक के नाम पर बस जनता की गाठी कमाई और कीमती समय का मजाक बनाते रहेंगे! तिस पर हिमाचल की लोकेशन भी कुछ वेब सीरीज से मिलती जुलती। ठीक वैसी जैसे आपने अभी ‘अनदेखी’ और ‘आरण्यक’ में देखी थी। बस कुछ नहीं इस फिल्म को देखते हुए लगता है जैसे फिल्म की टीम से कहीं ज्यादा अक्षय पाजी का मूड था हिमाचल घूमने का तो बस जी आप लोगों ने भी झोला उठाया और चल दिए बगल में कैमरा दबाए क्यों!

जब पूरी फिल्म में क्राइम तो हो लेकिन थ्रिल केवल कागज़ी तौर पर स्क्रिप्ट में नजर आए पर्दे पर ना दिखे तो उस थ्रिल से क्या मतलब? जब क्रिमिनल के बारे में जान लेने की जिज्ञासा आप ज्यादा ना जगा पायें पर्दे पर तो सस्पेंस तो वैसे भी नहीं रहा! कहीं रहा हो तो बताएं? फिर भले रंजीत तिवारी जी आपने डायरेक्शन भले उम्दा किस्म का कर लिया हो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि आखिरकार आप लेकर भी तो रीमेक ही आ रहे हैं न थाली में? वो भी ऐसा रीमेक जिसका पहले से रीमेक बन चुका है।

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डायरेक्शन उम्दा कर भी लिया चलो लेकिन फिल्म में कोई तेजी? कोई ऐसी बात आपने रखी जिससे आपकी ये ‘कटपुतली’ फिर ये नाम भी ‘कटपुतली’ ही क्यों? ‘कठपुतली’ या कोई और क्यों नहीं? दरअसल आपको दर्शकों का काटना ही तो था! नहीं? और सिनेमाघरों में ना जा पाने वाले या बायकॉट के नाम पर झूठा दिखावा करके दूसरों से ओटीटी का सब्क्रिपशन लेकर चुपके से फ़िल्में देख लेने वालों आपका भी इस हफ्ते ओटीटी पर अच्छा काटा गया है। इससे अच्छा होता एडिटर को पकड़ कर आप फिल्म को थोड़ा काट देते। क्या चला जाता? या असीम अरोड़ा ने जो इस फिल्म के लिए ऐसी राइटिंग का काम किया उनकी पगार आप काटेंगे अब? या डायरेक्टर , प्रोड्यूसर, एक्टर आदि किसी का भी काटेंगे आप? नहीं ना? तो जनता ही क्यों?

ऐसी फिल्मों के लिए सबसे ज्यादा दोष फिल्म के लेखकों को दिया जाना चाहिए जो पहले से पकी पकाई फिल्मों या खिचड़ी को भी फिर से ठीक से तल, भून न सकें स्क्रीनप्ले से। एक्टिंग के नाम पर अब अक्षय कुमार बस अपना पैसा बनाने की कोशिश करते नजर आते हैं एक्टिंग तो जैसे उनके लिए गये जमाने की बात तो गई हो। हाँ मेकअप वाले भईया ने थोड़ा काम ठीक किया है। रकुल प्रीत सुहानी लगती है। चंद्रचूड़ सिंह भी ठीक रहे। सरगुन मेहता एक-आध सीन छोड़ सब जगह हल्की नजर आईं। बेहतर हो की वे पंजाबी में ही फ़िल्में करें। बाकी फिल्म में ऐसा कुछ नहीं की इसे हिंदी पट्टी वालों ने भी अगर तमिल वाली फिल्म देखी है तो इसे देख पाएंगे। हाँ जिन्होंने उसे न देखा हो वो इसे देखकर थोड़ा सा बस थोड़ा सा हैरान हो सकते हैं।

अपनी रेटिंग – 1.5 स्टार

Tejas Poonia
Tejas Poonia
लेखक - तेजस पूनियां स्वतंत्र लेखक एवं फ़िल्म समीक्षक हैं। साहित्य, सिनेमा, समाज पर 200 से अधिक लेख, समीक्षाएं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं, पोर्टल आदि पर प्रकाशित हो चुके हैं।

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