अलविदा 'लोटपोट' के जादूगर: दिग्गज संपादक पी.के. बजाज का निधन, पत्रकारिता और बाल साहित्य के एक युग का अंत

P.K Bajaj Passed away

नई दिल्ली | 26 फरवरी, 2026 भारतीय मीडिया, फिल्म पत्रकारिता और बाल साहित्य जगत के लिए आज का दिन एक गहरी रिक्तता लेकर आया है। मशहूर फिल्मी पत्रिका 'मायापुरी' और बच्चों की सर्वप्रिय कॉमिक मैगजीन 'लोटपोट' के मुख्य संपादक श्री पी.के. बजाज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली के एक अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्य, पत्रकारिता और बॉलीवुड जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

एक विजनरी संपादक का सफर: मध्यम वर्ग को दी नई पहचान

श्री पी.के. बजाज केवल एक संपादक नहीं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व थे जिन्होंने भारतीय मध्यम वर्ग के मनोरंजन की परिभाषा बदली। 1974 में जब उन्होंने 'मायापुरी' की शुरुआत की, तब फिल्मी खबरों का ऐसा व्यवस्थित मंच मौजूद नहीं था। उन्होंने इसे भारत की सबसे लोकप्रिय और विश्वसनीय फिल्मी साप्ताहिक पत्रिका के रूप में स्थापित किया। उस दौर में, जब इंटरनेट और सोशल मीडिया का नामोनिशान नहीं था, पी.के. बजाज के संपादन में 'मायापुरी' ने ही फिल्मी सितारों और उनके प्रशंसकों के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया। हर शुक्रवार पाठक इस पत्रिका का बेसब्री से इंतजार करते थे।

'लोटपोट' और करोड़ों बच्चों का बचपन

बच्चों के प्रति बजाज जी का लगाव जगजाहिर था। उन्होंने 'लोटपोट' पत्रिका के माध्यम से न केवल बच्चों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें जीवन के नैतिक मूल्य भी सिखाए। आज के दौर के सबसे लोकप्रिय एनिमेटेड किरदार 'मोटू-पतलू' को जो वैश्विक पहचान मिली है, उसकी नींव 'लोटपोट' के पन्नों में ही पी.के. बजाज की देखरेख में रखी गई थी। चाचा चौधरी और साबू जैसे दिग्गजों के दौर में भी 'लोटपोट' के किरदारों (जैसे घसीटा राम, डॉ. झटका) को प्रासंगिक बनाए रखना उनकी असाधारण संपादकीय कुशलता का ही प्रमाण था।

साहित्य और मनोरंजन का संगम

पी.के. बजाज जी ने दशकों तक भारतीय फिल्म पत्रकारिता और बाल साहित्य को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। उनके कार्यकाल में 'मायापुरी' ने कभी अपनी गरिमा नहीं खोई और हमेशा स्वस्थ पत्रकारिता को बढ़ावा दिया। वहीं 'लोटपोट' के माध्यम से उन्होंने पीढ़ियों को पढ़ने की आदत डाली। उनके सहयोगियों का कहना है कि वे हर लेख और हर कार्टून स्ट्रिप को खुद बारीकी से देखते थे ताकि पाठकों तक सर्वश्रेष्ठ सामग्री पहुँचे।

मीडिया जगत की अपूरणीय क्षति

उनके निधन पर देश के बड़े पत्रकारों, लेखकों और फिल्मी हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि पी.के. बजाज जी का जाना उस पुरानी पीढ़ी के पत्रकारिता के स्तंभ का ढहना है, जहाँ निष्पक्षता, शालीनता और पाठकों का प्रेम ही सर्वोपरि था।

अंतिम विदाई: उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में किया जाएगा, जहाँ बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और फिल्म जगत से जुड़े लोग उन्हें अपनी अंतिम विदाई देने पहुँचेंगे। उनके पीछे उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य और करोड़ों पाठकों की यादें रह गई हैं।

श्रद्धांजलि: "आज मोटू-पतलू भी उदास हैं और मायापुरी की गलियों में भी सन्नाटा है। पी.के. बजाज जी का योगदान हमेशा भारतीय साहित्य के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।"

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