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INTERVIEW: “एक लड़की काम करने के साथ-साथ घर की देखभाल भी कर सकती है“ - मावरा हुसैन

INTERVIEW: “एक लड़की काम करने के साथ-साथ घर की देखभाल भी कर सकती है“ – मावरा हुसैन

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बेहद खूबसूरत और युवा मावरा हुसैन काफी प्रतिभाशाली अभिनेत्री, वीजे और मॉडल हैं। एक वीजे के रूप में काम करने से पहले मावरा ने एक थिएटर कलाकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी, और शीघ्र ही जिन्दगी के धारावाहिक, यहाँ प्यार नहीं और गुलों में रंग जैसे टीवी धारावाहिकों के माध्यम से लोकप्रियता हासिल की। हाल ही में उन्होंने रोमांटिक फिल्म सनम तेरी कसम से बॉलीवुड में कदम रखा और इसके साथ ही दो अन्य बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आने वाली हैं। अपने अभिनय के करियर के साथ-साथ मावरा यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इस्लामाबाद से कानून की पढ़ाई भी कर रही हैं।

वर्तमान में मावरा को जिन्दगी के प्राइमटाइम शो, “मैं बुशरा” में देखा जा सकता है, जिसका प्रसारण हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे किया जाता है। यह पारिवारिक नाटक, एक युवा, शिक्षित और विश्वास से भरी महिला, बुशरा वारसी के बारे में है, जो अपने पिता को बताना चाहती है कि बेटियाँ भी बेटों के समान सक्षम होती हैं।

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मावरा इस धारावाहिक की प्रमुख पात्र बुशरा की भूमिका में हैं, जो एक मध्यवर्गीय परिवार की बेटी हैं, और उनके पिता नासिर (वसीम अब्बास) को केवल पुत्र प्राप्ति की इच्छा है। बुशरा एक ऐसे परिवार की लड़की है, जो बेटियों से ज्यादा बेटों के महत्व में विश्वास रखता है। बुशरा और उसकी बहनें अनजाने में इस मानसिकता की शिकार होती हैं। बुशरा लगातार इस मानसिकता को दूर करने और स्वयं को परिवार के योग्य साबित करने के लिए प्रयासरत रहती है। बुशरा उच्च लक्ष्यों को तय करने और बिना रुके उसे पाने में विश्वास रखती है, लेकिन उसका परिवार ही उसकी सफलता के रास्ते में बाधा बन जाता है। अपने विरुद्ध इस प्रकार के पूर्वाग्रहों के बावजूद, बुशरा हमेशा कुछ अलग तरीके से उन लोगों की मदद करने के लिए आगे आती है, जिन्हें वह प्यार करती है, और इसमें अक्सर उसे अपनी इच्छाओं का बलिदान करना पड़ता है

मावरा हुसैन
मावरा हुसैन

“मैं बुशरा“ में अपनी भूमिका के बारे में बताएँ?

बुशरा का अर्थ है ‘शुभ समाचार‘, और इस शो में मेरा नाम बुशरा इसलिए रखा गया है क्योंकि मेरे परिवारवाले एक लड़का पैदा होने की आस लगाए रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है और इसके बजाय परिवार में 4 बेटियाँ पैदा हो जाती हैं। इसलिए इस शो में मेरे पिता हमेशा अपने घर में एक बेटा नहीं होने के लिए अपनी बेटियों को दोषी मानते हैं, और इसी वजह से बुशरा स्वयं को अपने पिता की नजरों में उनका बेटा साबित करना चाहती है, और बताना चाहती है कि वह उन सभी कामों को कर सकती है जिसकी उन्होंने एक बेटे से उम्मीद की होगी। मेरा किरदार अपने पिता के बोझ को उसी तरीके से कम करना चाहता है, जैसा उनके बेटे ने उनके लिए किया होता। इस प्रकार, यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जो अपने पिता को भावनात्मक और आर्थिक स्तर पर सहयोग देकर उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं होने देना चाहती है, और वह अपने पिता की स्वीकृति प्राप्त करने के लिए अकेले ही संघर्ष करती है।

इस किरदार को निभाने के बाद आप कैसा महसूस करती हैं?

मुझे बड़ा अच्छा लगता है। आपको यह अहसास होता है कि कोई भी आदमी किसी से ऊपर या नीचे नहीं है, और हर किसी को अपनी क्षमता पर निर्भर रहना चाहिए और अपनी क्षमता का आकलन करना चाहिए, या नहीं तो कम से कम एक प्रयास तो जरुर करना चाहिए। इस प्रकार की भूमिका करने के बाद आपको पता चलता है कि, किस प्रकार कुछ लोगों को अपने जीवन में संघर्ष करना पड़ता है, और आपको अपने जीवन में जो वस्तुएँ प्राप्त हुई हैं, उसके लिए ईश्वर का आभारी होना चाहिए।

मावरा हुसैन
मावरा हुसैन

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क्या आपने अपने जीवन में इस तरह की बातों का अनुभव किया है?

बिल्कुल, मैंने भी इसका अनुभव किया है। मुझे लगता है कि हम सभी को अपने जीवन में कहीं न कहीं संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन ‘मैं बुशरा’ जैसे किसी किरदार को निभाने के बाद आप अपने जीवन में बहुत सी बातें सीखते हैं, जैसे कि, किस प्रकार आपके जीवन में अन्य लोगों की तरह इतनी समस्याएँ नहीं है। मैं यह बात समझ गई, कि किस प्रकार मेरा किरदार खुद को साबित करने के लिए हर संभव प्रयास करता है, और इसी बात ने मेरे व्यक्तित्व को काफी बदल दिया।

आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहती हैं?

मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ, कि हमें हमेशा यह कहा जाता है कि एक परिवार में लड़के का पैदा होना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर लड़का पैदा नहीं होगा तो परिवार का भरण-पोषण कौन करेगा। लेकिन मेरे विचार से यह सही नहीं है, अगर आप एक लड़की हैं, तो आपके पिता को उसी प्रकार खुश होना चाहिए, जैसे कि वह एक बेटे के होने पर खुश होते। आपको एक महिला होने में गर्व का अनुभव करना चाहिए और आपके भीतर यह विश्वास होना चाहिए, कि जरूरत पड़ने पर आप भी सब कुछ अकेले कर सकती हैं, परिवार की समस्याओं का सामना करने से लेकर बाहरी दुनिया की समस्याओं का सामना करने तक, आप हर काम कर सकती हैं। एक लड़की काम करने के साथ-साथ घर की देखभाल भी कर सकती है।

मावरा हुसैन
मावरा हुसैन

महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में काम करना कितना मुश्किल है?

मैंने मनोरंजन क्षेत्र में कभी किसी भी कठिनाई का सामना नहीं किया। मैंने 4 साल पहले अपने काम की शुरूआत की थी, और उसके बाद से मुझे खुद के लिए भी समय नहीं मिल पाया है। इस क्षेत्र में योग्यता की कद्र होती है, और अगर आप अपने काम में बेहतर हैं, तो आपको काम मिलता रहेगा।

भविष्य में आप किस तरह की भूमिकाएँ करना चाहती हैं?

मैं नहीं जानती कि मैं किस तरह के किरदार निभाना चाहती हूँ, लेकिन मैं इस बात से बेहद उत्साहित हूँ कि, मैं पाकिस्तान और भारत, दोनों जगहों पर काम करने में सक्षम हूँ और दोनों मुल्कों की जनता से मुझे एकसमान प्यार मिला है। और जहाँ तक मेरी पसंद की बात है, तो मैं उमराव जान और बाजीराव मस्तानी जैसे ऐतिहासिक किरदारों को निभाना चाहती हूँ।

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