INTERVIEW!! मुझे इस कैरेक्टर से बेहद प्यार है – रेयान रेनॉल्ड्स

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डेडपूल – रेयान रेनॉल्ड्स से फिल्म के बारे में बातचीत
डेडपूल एक सांइस फिक्शन मूवी है जो 12 फरवरी को समस्त भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। इस फिल्म को हिंदी के अलावा तेलुगू और तमिल भाषाओं में डब करके प्रदर्शित किया जाएगा। फिल्म के ट्रेलर जारी होने के पहले ही दिन इसे जबर्दस्त रिस्पोंस मिला और लगभग 1 लाख लोगों ने इसके ट्रेलर को देखा। एक्स मैन फिल्म से इंस्पायर्ड इस फिल्म का निर्देशन टिम मिलर ने किया है। वेड विंटसटन विल्सन (रेनॉल्ड्स) की असल जिंदगी पर आधारित यह ऐसी फिल्म है जिसमें उसे अपने असाध्य कैंसर के इलाज के लिए एक्स प्रोग्राम का सहारा लेना पड़ता है जिसने वुल्वरिन को जन्म दिया। स्थायी रूप से विकृत वुल्वरिन असहनीय दर्द का शिकार है और दर्द उसके घाव को पुनर्जीवित कर रहे हैं।

इस कैरेक्टर के प्रति आपकी रुचि कैसे बढ़ी?

2004 में इसके कामिक्स थोक भाव में मिले और जैसे-जैसे अमरीकन मार्वेल कामिक्स पढ़ता गया, वैसे-वैसे इसके प्रति रुचि बढ़ती गई। मुझे इस कैरेक्टर से बेहद प्यार है और अभी तक विश्वास तक नहीं कर पा रहा हूं कि मुझे इस कैरेक्टर के बारे में पहले से जानकारी है। मैं तो उस कैरेक्टर के बारे में सोचकर ही विस्मित हो जाता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि ज्यादातर लोगों इस गफलत के शिकार होंगे कि इस कैरेक्टर के साथ न्याय कैसे करेंगे, फिर इसे फिल्म के माध्यम से पेश करना ही अस्पष्ट और अटपटा सा दिखता है क्योंकि विकृत चेहरे को देखकर आप आत्म-घृणा और प्रतिकूलता से भर जाते हैं और दिखने में भी वो भद्दा लगता है।

डैडपूल
डैडपूल

फिल्म की मूल संरचना की खोज और इसे निभाने में किस प्रकार की चुनौतियां आईं?

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यह एक खंडित कथा है जिसे प्रस्तुत करने में हमेशा मुश्किलें आती हैं। यही वजह रही कि हमने दर्शकों को कहानी के पूर्व और आगे की घटनाओं को एक-साथ प्रस्तुत किया है ताकि उन्हें कहानी से जुडने में सहुलियत महसूस हो सके। सौभाग्य से हमें एक ऐसा कैरेक्टर मिला जो विकृत है पर मैं उसे विकृत नहीं कर रहा हूं। कॉमिक्स को पढने के बाद पटकथा लेखक को पूरी स्वतंत्रता थी कि कहानी के आधार पर वह स्वतंत्र निर्णय ले सकें।

रेयान रेनॉल्ड्स
रेयान रेनॉल्ड्स

आपने जिक्र किया कि डेडपूल अंतिम कॉमिक्स उपन्यास है जिसके चरित्र को आपने पर्दे पर जीवंत किया। इस चरित्र को निभाने के अनुभव कैसे रहे?

यह चरित्र आज भी मेरे इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। इस प्रकार के चरित्र को निभाने का एक अलग आनंद है और हमेशा मेरी ख्वाहिश रहेगी कि इस प्रकार के कैरेक्टर्स को निभाने का अवसर मिले। यह मेरे लिए घरेलू माहौल जैसा है। भले ही डेडपूल सुपरहीरो नहीं, एंटी-हीरो है मगर यह दूसरे किरदारों से बिल्कुल अलग है। यह कॉमिक के दीवाने या साइंस फिक्शन पसंद करने वाले पाठकों और दर्शकों से सीधा संवाद कर सकता है और मैंने इसके लिए अपना सौ प्रतिशत दिया है। अगर यह ट्रेडिशनल सुपरहीरो मूवी नहीं होती तो इसे मैं हरगिज पर्दे पर साकार नहीं करता, निर्माता मुझे इस फिल्म के लिए फिट नहीं समझते, मैंने इस चरित्र को अकेले जीने का प्रयास किया और जब मौका मिला और मैंने इसे पूरा भी किया। मेरी कामना है कि अब इस काम को दूसरे लोग आगे लेकर जाएं।

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